कभी तन्हाई में दिल
से आवाज आती
हे, जो बाते
कहनी हे तुझसे,
जाने क्यों बस
होटों पे रह
जाती हे,
निगाहे सब बयां
करे फिर भी
एक कसक सी
रह जाती हे.
आज दिल की
बातो को दिल
में ना रहने
दो....
खोल दो सिले
होटों के परदे,
उड़ा दो घुटन
के बादलो को
खुल कर हवा
दो ज़रा अपने
दिल के अरमानो
को
दिल के आवाज
को ज़रा बुलंद
तो करो
कह डालो जो
हे कहना
फिर कभी ना
कहना ....................
दिल को सुकून नहीं। ..........................
दिल की बात ....... दिल से ...........
Meenakshi